वक़्त की नब्ज़ — AI 1. AI क्या है — डर या दोस्त?
1. AI क्या है — डर या दोस्त? तुमने कहा — ये AI वाई क्या बला है? मैंने पूछा — या तुम जानना ही नहीं चाहते? हर युग में एक ऐसा मोड़ आता है जब इंसान दो रास्तों पर खड़ा होता है — एक रास्ता जाना-पहचाना होता है, आरामदायक होता है, और दूसरा रास्ता अनजाना होता है, धुंधला होता है। और अक्सर हम वही रास्ता चुनते हैं जो जाना-पहचाना है — भले ही वो रास्ता अब कहीं नहीं जाता। AI आज वही दूसरा रास्ता है। जब पहली बार रेलगाड़ी चली थी तो लोगों ने कहा था — "इतनी तेज़ रफ़्तार से इंसान का दिल बंद हो जाएगा।" जब पहली बार हवाई जहाज़ उड़ा था तो लोगों ने कहा था — "परिंदों की तरह उड़ना इंसान के बस की बात नहीं।" जब पहली बार इंटरनेट आया था तो लोगों ने कहा था — "ये सब कुछ बर्बाद कर देगा।" रेलगाड़ी चली — इंसान का दिल नहीं बंद हुआ। हवाई जहाज़ उड़ा — दुनिया क़रीब आ गई। इंटरनेट आया — ज्ञान का दरवाज़ा हर इंसान के लिए खुल गया। और आज AI आया है — तो डर फिर वही पुराना है, बस चेहरा नया है। लेकिन AI है क्या आख़िर? सीधे शब्दों में — AI यानी Artificial Intelligence एक ऐसा औज़ार है जो तुम्हारी बात सुनता है...