89. सही या गलत -निर्णय आपका !
अमीर लोग उनके साथ उठते-बैठते है जो उनकी तरह विजेता होते है जबकि गरीब लोग उनके साथ जो उनकी तरह गरीब होते है या हारे हुए - ये अपने-अपने कम्फर्ट जोन का मामला है . गरीब लोग अमीरों के साथ , विजेताओं के साथ असहज महसूस करते है , गरीबों को लगता है कि ये अमीर लोग मुझे अस्वीकार कर देंगे , मैं इनकी श्रेणी का नहीं हूँ सो अपने अहम की संतुष्टि के लिए वे अमीरों में दोष तलाशते हैं और कोई न कोई आलोचना की वजह ढूंढ़ ही लेते हैं . और किसी न किसी बहाने वहां से हटकर अपने जैसी समान मानसिकता वालों को तलाश कर उनमे मिक्स-अप हो जाते हैं . अमीरों की प्रतिक्रिया कुछ अलग रूप लेती है वो गरीबों को एक हारा हुआ वर्ग मानता है और उनके लिए उसके मन में दया का भाव रहता है , उपदेश का भाव रहता है - उच्च स्तर पर जाकर सोचे तो ये भी दोष तलाशना और आलोचना करना ही हुआ - शब्दों और व्यवहार में चाशनी भर है .वे भी किसी न किसी बहाने वहां से हट...