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वक़्त की नब्ज़ — AI 1. AI क्या है — डर या दोस्त?

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1. AI क्या है — डर या दोस्त? तुमने कहा — ये AI वाई क्या बला है? मैंने पूछा — या तुम जानना ही नहीं चाहते? हर युग में एक ऐसा मोड़ आता है जब इंसान दो रास्तों पर खड़ा होता है — एक रास्ता जाना-पहचाना होता है, आरामदायक होता है, और दूसरा रास्ता अनजाना होता है, धुंधला होता है। और अक्सर हम वही रास्ता चुनते हैं जो जाना-पहचाना है — भले ही वो रास्ता अब कहीं नहीं जाता। AI आज वही दूसरा रास्ता है। जब पहली बार रेलगाड़ी चली थी तो लोगों ने कहा था — "इतनी तेज़ रफ़्तार से इंसान का दिल बंद हो जाएगा।" जब पहली बार हवाई जहाज़ उड़ा था तो लोगों ने कहा था — "परिंदों की तरह उड़ना इंसान के बस की बात नहीं।" जब पहली बार इंटरनेट आया था तो लोगों ने कहा था — "ये सब कुछ बर्बाद कर देगा।" रेलगाड़ी चली — इंसान का दिल नहीं बंद हुआ। हवाई जहाज़ उड़ा — दुनिया क़रीब आ गई। इंटरनेट आया — ज्ञान का दरवाज़ा हर इंसान के लिए खुल गया। और आज AI आया है — तो डर फिर वही पुराना है, बस चेहरा नया है। लेकिन AI है क्या आख़िर? सीधे शब्दों में — AI यानी Artificial Intelligence एक ऐसा औज़ार है जो तुम्हारी बात सुनता है...

45 .ज़िंदगी – एक नज़रिया

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ज़िन्दगी का हर लम्हा हमें कुछ न कुछ सीखने का मौका देता है , ये हम पर है कि हम कुछ सीखते है या हमारे साथ या  हमारे  सामने होने वाली घटनाओं को यूँ ही जाने देते है . मुझे याद है बरसों पहले मैं नैनीताल में घूमने गया था , मैं नौकुचिया ताल देखने गया था , मैं वहां बैठा था और वहां की खूबसूरती, शोरगुल ,टूरिस्ट्स की मस्तियों को एन्जॉय कर रहा था . एक घटना पर मैंने गौर किया - एक कुत्ता बार-बार वहां आता और पानी में अपनी परछाई देखता , डरता , पीछे हटता, भौंकता और वा पिस चला जाता ,, अंततः वो आया और झील में कूद गया और पानी पीकर चला गया . उस घटना से मैंने ये सीखा कि ज़िन्दगी भी इससे अलग नहीं है - कुछ इंसान अपने डर को देखकर रूक जाते है ,प्यासे रहते है ,लौट जाते है और कुछ लोग जिन्हे अपनी उन्नति की, चाहत की ,ख्वाइशों की प्यास ज्यादा होती है वो डर के बावजूद हिम्मत करते है और डर की झील में कूद कर अपनी प्यास बुझा लेते है, जो उन्हें चाहिए होता है वो हासिल कर लेते है . अपने आस-पास , अपने इर्द-गिर्द होने वाली घटनाओं को यूँ ही ना जाने दे उन पर गौर करें और उन घटनाओं का सही अर्थ निकाले.अगर आपने अपने में...

44 .ज़िंदगी – एक नज़रिया

ज़िन्दगी हमेशा चुनौतीपूर्ण होती है और चुनौती में बने रहना भी चुनौतीपूर्ण होता है . एक जैसी परिस्थितियाँ किसी के लिए आसान और सहज होती है और किसी के लिए कठिनाइयाँ बन जाती है, समस्या बन जाती है . हर नई परिथिति हर एक के लिए शुरू में कठिनाई ही होती है ,मुश्किल ही होती है , मुसीबत ही होती है लेकिन कुछ लोग मुश्किल को,कठिनाई को, मुसीबत को हार की वजह नहीं बनना देना चाहते और पीछे हटने की बजाय चुनौती मान कर आगे बढ़ कर उस परिस्थिति  का सामना करते है .सिर्फ सोचने का एक तरीका कि कठिनाई को कठिनाई न मानकर अभ्यास की कमी मानना और चुनौती की तरह स्वीकार करना उन्हें विजयी बना देता है , परिस्थिति को आसान बना देता है . जबकि कुछ लोगों के लिए हर परिस्थिति कठिनाई ही होती है चूँकि ये उनके सोचने का तरीका होता है., नजरिया होता है लिहाज़ा उनकी असफलता की, हार की संभावनाएं बढ़ जाती है आख़िरकार वे ज़िन्दगी को भी एक समस्या मानने लगते है;उन्हें सिर्फ अपने सोचने का तरीका बदलने की जरुरत है . पीक ऑवर में लोकल ट्रेन पकड़ना क्या है? कुछ लोगों के लिए ट्रेन पकड़ना मुसीबत है लेकिन कुछ लोगों के लिए ये सिर्फ एक चुनौ...

43 . ज़िंदगी – एक नज़रिया

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महत्त्वपूर्ण कहना नहीं , दिखना नहीं , बल्कि करना होता है और करने से भी ज्यादा महत्त्वपूर्ण होना होता है . कहा बहुत कुछ जाता है लेकिन किया नहीं जाता , दिखता बहुत कुछ है कि ये किया जा रहा है लेकिन होता नहीं है ,रिजल्ट जो कहा जाता है वो नहीं आता है . जब करना शुरू करते है तो करने के दरम्यान गलतियां करते हुए और उन गलतियों से सीखते हुए हम सफल होना शुरू कर देते है ,सफलता की शेप में ढलना शुरू कर देते है और उसे ही होना कहते है . एक बार जब आप "हो" जाते है तो सफलता आप से दूर नहीं रहती .अपनी हार के बावजूद भी सफलता का फार्मूला आपके पास होने की वजह से आप सफल हो ही जाते है. कहना नहीं, दिखना नहीं बल्कि करना शुरू करे ;सफलता की शुरुवात करने से होती है . असफलता के डर को त्याग दे क्योंकि असफलता ही सफलता की कुँजी है . सुबोध-अक्टूबर ३०, २०१५

42 . ज़िंदगी – एक नज़रिया

विकास या पतन हमेशा व्यक्तिगत होता है. .इसके लिए किसी व्यक्ति,परिवार ,समाज,माहौल,संस्कार या परंपरा को दोष देना अपनी जिम्मेदारी से बचना भर है,जिम्मेदारी नकारना है. एक शराबी बाप के दो बेटों में से एक शहर का गरीब मशहूर शराबी बनता है और दूसरा धनवान मशहूर उद्योगपति बनता है जबकि ज़िन्दगी की शुरुआत में दोनों के लिए ही एक समान सब कुछ था . शराबी से पूछा गया तुम ऐसे क्यों हो ? उसका जवाब था - मैंने अपने पिता को देखा कि वे शराब पीते है और किसी भी प्रकार के तनाव से मुक्त होकर मस्त हो जाते है .इसलिए मैं उनके जैसा बन गया. दूसरे भाई से जब यही सवाल पूछा गया तो उसका जवाब था मैंने अपने शराबी पिता को देखा है कि किस तरह वे शराब पीकर अपनी जिम्मेदारी से मुँह चुराते थे, पलायन का रास्ता अपनाते थे और जिस दिन वे शराब पीकर आते थे उस दिन मेरी माँ को परेशान होते हुए और रोते हुए देखा है तभी मैंने सोच लिया था मुझे अपने पिता जैसा नहीं बनना है . ये आप पर है कि आप किस घटना पर क्या सोचते है क्या रियेक्ट करते है इसके लिए किसी दुसरे को दोष देना गलत है . अगर आप अच्छे है तो अपनी वजह से है,बुरे है तो अपनी वजह...

27 . ज़िंदगी – एक नज़रिया

सच क्या सिर्फ वही है जो तुम देखते हो , महसूस करते हो , छूते हो, गले लगाते हो, जीते हो और ख़ुश होते हो कि तुम सच से रूबरू हो !!! सच का एक दूसरा पहलू भी होता है जिसे तुम सब कुछ जाने के बाद भी नहीं जानते !!! एक अनदेखा ,अन्जाना, अचिन्हित सच !! तुम्हारा आज का सच क्या पता कब सिक्के का दूसरा पहलु बन जाए !! जिस सच को तुम पकड़ कर गौरवान्वित हो रहे हो,एक कोलंबस उसे तिरोहित कर देता है !!! एक नई खोज , एक नया आविष्कार कितनी पुरानी धारणाएं, कितने पुराने सच बदल देता है सोच कर आश्चर्य है क ि हम किस सच को ज़िन्दगी का सम्बल मान रहे है !! उस सच को - जिसके बारे में निश्चित नहीं कि कल वो सच सच रहेगा या नहीं !!! तांगे का सच ' नया दौर ' के दिलीप कुमार का सच हो सकता है लेकिन ज़िन्दगी का सच नहीं हो सकता , अगर उस सच को , उस बदलाव को आप स्वीकार नहीं कर पा रहे है तो निश्चित ही आप ज़माने की रफ़्तार को रोकने की कोशिश कर रहे है , कोडक कैमरे के भरोसे मोबाइल के फोटो फीचर्स को रोकने का प्रयास कर रहे है !! इस सूचना क्रांति युग में कोई भी सच कभी भी पुराना सच हो सकता है - एक रिकॉर्ड प्लेयर की तरह !! पुराने सच का सम्मान...

37 . पैसा बोलता है ...

तुम्हारी हार की वजह , असफलता की वजह तुम्हारा अहंकार है कि मैं सब कुछ जानता हूँ - मैं मानता हूँ तुम बहुत कुछ जानते हो , जवान हो , काबिल हो, नई पीढ़ी से हो, टेक्नोलॉजी कैसे काम करती है, सिस्टम कैसे बनाये जाते है , कैसे चलाये जाते है - सब कुछ जानते हो तुम और इस सब कुछ जानने ने तुम्हे अहंकारी बना दिया है जिसे तुम सब कुछ जानना समझ रहे हो और जिस वजह से तुम्हे अपने ज्ञान का गुरूर है वो सब कुछ जानना तब तुम्हारी हार की पोल खोल देता है जब तुम्हारे बैंक स्टेटमेंट द ेखे जाते है !! तुम्हारा सारा ज्ञान किताबी ज्ञान है , सामाजिक ज्ञान है , लफ्फाजी ज्ञान है - इतने वाक्पटु हो तुम , इतने कॉंफिडेंट नज़र आते हो कि किसी को भी भरमा सकते हो , जब मार्केटिंग की बात आती है तो जितनी डिटेल में जाकर तुम चीज़ों को बयां करते हो , तुम पर गर्व होता है , जब सेल्स की बात आती है तो जितने कफिडेन्स से तुम क्लाइंट से बात करते हो और प्रोडक्ट सेल कर देते हो , आश्चर्य होता है और तुम्हारे भविष्य को सिक्योर महसूस करता हूँ लेकिन परेशान तब हो जाता हूँ जब तुम्हारे बैंक स्टेटमेंट देखता हूँ !! क्या है ऐसा जो तुम नही...