कुछ टुकड़ों में
मेरी जेब की खनखनाहट क्यों कर चुभती है तुम्हे , जिंदादिली के एवज़ में चंद सिक्के मिले है मुझे . सुबोध- १४ जनवरी, २०१४ ------------------ सारे तीज-त्योंहार तुम्हारे थे , तुमने मनाये थे , मैं अपने घर से दूर था इतना कि सिर्फ ख्याल मेरे पास थे सुबोध- १४ जनवरी, २०१४ ----------- तुम्हारा सुकून तुम्हारे साथ था और मेरी उलझने मेरे साथ तुम दस्तरखान पर बैठे थे और मैं रिज़क कमा रहा था सुबोध- १४ जनवरी, २०१४