बेवफा

जी करता है
टूटी चूड़ी सा
उफ़क़ पर टंगा
चौथ का चाँद उतार
तेरे लिए
नथनी का छल्ला बना दूँ
या कान की बाली
पर फिर सोचता हूँ
अगर तू बेवफा निकली तो
आसमान बहुत रोयेगा
मेरा क्या है
मैं तो मर्द  हूँ !!!!

सुबोध  ५ जून,२०१४
 

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