सफलता -एक उम्मीद


जिस ऊंचाई की बात तुम करते हो
डर लगता है
उस ऊंचाई के बारे में सोच कर भी
लेकिन जब सोचता हूँ , मथता हूँ खुद को
तो पाता हूँ
सौ मील का फ़ासला भी
कदम-कदम चल कर तय होता है ,
आज इतना बड़ा मैं
एक-एक दिन गुजार कर हुआ हूँ
तो हासिल कर लूंगा
वो ऊंचाई भी
जिसकी बात तुम करते हो
रफ्ता-रफ्ता ...

सुबोध- अप्रैल ७, २०१५

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

42 . ज़िंदगी – एक नज़रिया

31 . ज़िंदगी – एक नज़रिया

32 . ज़िंदगी – एक नज़रिया