गलतियां हर इंसान करता है - अगर वो ज़िंदा है तो ! लेकिन फर्क इससे पड़ता है कि आपने उन गलतियों पर प्रतिक्रिया क्या और कैसे की है ,आपने गलती होने के बाद अपना माथा पीटा है या उन गलतियों से सबक लिया है .आपने आगे से कोई गलती न हो जाए इस डर से चलना ही बंद कर दिया है या बार-बार गलती कर कर, गिर-गिर कर साईकिल चलाना सीख लिया है . अगर आपने साईकिल चलाना सीख लिया है तो जाहिर सी बात ह ै उन दिनों आपके अंदर कोई एक आग जल रही थी ,कोई एक लगन लगी थी जो बार-बार गिरने ,चोट लगने के डर से ज्यादा ताकतवर थी . और अगर आपने नहीं सीखा है तो इसकी वजह ये नहीं थी कि साइकिल लम्बी थी या पेडल तक आपके पैर नहीं पहुँच पा रहे थे या पीछे से पकड़ने वाला सही नहीं था या आपको सिखानेवाला कोई भी नहीं था बल्कि असली वजह ये थी कि आपमें वो आग ही नहीं थी ,वो लगन ही नहीं थी जो आपको साइकिल चलाना सिखवा दे . तीन साल पुरानी घटना याद आती है ,रात को एक बजे ठक -ठक की आवाज़ आ रही थी मैंने जानकारी की तो पता चला कपूर साहब का लड़का क्रिकेट सीख रहा है ,रात को एक बजे अपने किसी दोस्त के साथ वो डिफेन्स की प्रैक्टिस कर रहा था ,इस...
1. AI क्या है — डर या दोस्त? तुमने कहा — ये AI वाई क्या बला है? मैंने पूछा — या तुम जानना ही नहीं चाहते? हर युग में एक ऐसा मोड़ आता है जब इंसान दो रास्तों पर खड़ा होता है — एक रास्ता जाना-पहचाना होता है, आरामदायक होता है, और दूसरा रास्ता अनजाना होता है, धुंधला होता है। और अक्सर हम वही रास्ता चुनते हैं जो जाना-पहचाना है — भले ही वो रास्ता अब कहीं नहीं जाता। AI आज वही दूसरा रास्ता है। जब पहली बार रेलगाड़ी चली थी तो लोगों ने कहा था — "इतनी तेज़ रफ़्तार से इंसान का दिल बंद हो जाएगा।" जब पहली बार हवाई जहाज़ उड़ा था तो लोगों ने कहा था — "परिंदों की तरह उड़ना इंसान के बस की बात नहीं।" जब पहली बार इंटरनेट आया था तो लोगों ने कहा था — "ये सब कुछ बर्बाद कर देगा।" रेलगाड़ी चली — इंसान का दिल नहीं बंद हुआ। हवाई जहाज़ उड़ा — दुनिया क़रीब आ गई। इंटरनेट आया — ज्ञान का दरवाज़ा हर इंसान के लिए खुल गया। और आज AI आया है — तो डर फिर वही पुराना है, बस चेहरा नया है। लेकिन AI है क्या आख़िर? सीधे शब्दों में — AI यानी Artificial Intelligence एक ऐसा औज़ार है जो तुम्हारी बात सुनता है...
ज़िन्दगी का हर लम्हा हमें कुछ न कुछ सीखने का मौका देता है , ये हम पर है कि हम कुछ सीखते है या हमारे साथ या हमारे सामने होने वाली घटनाओं को यूँ ही जाने देते है . मुझे याद है बरसों पहले मैं नैनीताल में घूमने गया था , मैं नौकुचिया ताल देखने गया था , मैं वहां बैठा था और वहां की खूबसूरती, शोरगुल ,टूरिस्ट्स की मस्तियों को एन्जॉय कर रहा था . एक घटना पर मैंने गौर किया - एक कुत्ता बार-बार वहां आता और पानी में अपनी परछाई देखता , डरता , पीछे हटता, भौंकता और वा पिस चला जाता ,, अंततः वो आया और झील में कूद गया और पानी पीकर चला गया . उस घटना से मैंने ये सीखा कि ज़िन्दगी भी इससे अलग नहीं है - कुछ इंसान अपने डर को देखकर रूक जाते है ,प्यासे रहते है ,लौट जाते है और कुछ लोग जिन्हे अपनी उन्नति की, चाहत की ,ख्वाइशों की प्यास ज्यादा होती है वो डर के बावजूद हिम्मत करते है और डर की झील में कूद कर अपनी प्यास बुझा लेते है, जो उन्हें चाहिए होता है वो हासिल कर लेते है . अपने आस-पास , अपने इर्द-गिर्द होने वाली घटनाओं को यूँ ही ना जाने दे उन पर गौर करें और उन घटनाओं का सही अर्थ निकाले.अगर आपने अपने में...
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