उत्तर

जब से मेरी कलम के पेट में
भूख उगी है
वह उत्तर देने की बजाय
प्रश्न करने लगी है
और प्रश्नों के उस अलाव में
जो विश्वास
जो संस्कार
ज़िंदा है
उन्हें मैंने
अपनी धड़कन बना लिया है
क्योंकि इन्हें ही
मशाल बनकर
वह पथ ज्योतिर्मय करना है
जिस पर मैं
भूखी कलम के प्रश्नों के
उत्तर पाऊंगा ....


सुबोध मार्च १९८३

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