45 .ज़िंदगी – एक नज़रिया


ज़िन्दगी का हर लम्हा हमें कुछ न कुछ सीखने का मौका देता है , ये हम पर है कि हम कुछ सीखते है या हमारे साथ या हमारे सामने होने वाली घटनाओं को यूँ ही जाने देते है .
मुझे याद है बरसों पहले मैं नैनीताल में घूमने गया था , मैं नौकुचिया ताल देखने गया था , मैं वहां बैठा था और वहां की खूबसूरती, शोरगुल ,टूरिस्ट्स की मस्तियों को एन्जॉय कर रहा था . एक घटना पर मैंने गौर किया - एक कुत्ता बार-बार वहां आता और पानी में अपनी परछाई देखता , डरता , पीछे हटता, भौंकता और वापिस चला जाता ,, अंततः वो आया और झील में कूद गया और पानी पीकर चला गया .
उस घटना से मैंने ये सीखा कि ज़िन्दगी भी इससे अलग नहीं है - कुछ इंसान अपने डर को देखकर रूक जाते है ,प्यासे रहते है ,लौट जाते है और कुछ लोग जिन्हे अपनी उन्नति की, चाहत की ,ख्वाइशों की प्यास ज्यादा होती है वो डर के बावजूद हिम्मत करते है और डर की झील में कूद कर अपनी प्यास बुझा लेते है, जो उन्हें चाहिए होता है वो हासिल कर लेते है .
अपने आस-पास , अपने इर्द-गिर्द होने वाली घटनाओं को यूँ ही ना जाने दे उन पर गौर करें और उन घटनाओं का सही अर्थ निकाले.अगर आपने अपने में ये आदत डाल ली तो खुद को मोटीवेटेड रखने के इतने ज्यादा अवसर आपको मिलेंगे कि आप का अाने वाला कल निश्चित ही आपके आज से बेहतर होगा .
सुबोध-अक्टूबर २१, २०१५ .

टिप्पणियाँ

कविता रावत ने कहा…
अच्छी प्रस्तुति
आपको जन्मदिन की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनाएं!

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