Wednesday, June 4, 2014

अमीर यु हीं अमीर नहीं होता ( ५ )



बतखों के साथ तैरोगे,बतख बने रहोगे
उड़ोगे हंसो के बीच,हंस बन जाओगे
निर्भर है तुम पर
करना अपना चुनाव.
क्यों तैरते रहना चाहते हो गंदले तालाब में
डर लगता है आसमान की बुलंदियों से ?
या महसूस करते हो खुद को नाकाबिल ?
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ईश्वर ने तुम्हें नहीं भेजा है
बना कर भेड़ -बकरी
बल्कि भेजा है
शेर से भी ताक़तवर
मजबूत दिमाग वाले
इंसान के रूप में .
मत करो उसके वरदानों का अपमान
मत खेलो छोटा .
उसके दिए गुणों का
अधिकतम इस्तेमाल ही
बढ़ाता है तुम्हारा मूल्य .
क्यों बेचते हो सस्ते में खुद को ?
-
अमीर बनने के लिए जानना है तुमको
कैसे सुलझाई जाये
दूसरों की समस्याएं लाभ के साथ ?
जब मिल जाए इसका जवाब
तो सिर्फ खोजना है ये तरीका
कि कम समय में
कम मेहनत से
अधिक से अधिक लोगों की समस्याएं
कैसे सुलझाई जाए ?
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छोटी सोच और छोटे कदम
गरीबी की और ले जाते है
जबकि बड़ी सोच और बड़े  कदम
अमीरी की और ले जाते है
आओ कदम बढ़ाये उस राह पर
जहाँ बदसूरत बतखें
बनती है सुन्दर हंस !!!!

सुबोध- ४ जून,२०१४

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