Tuesday, October 27, 2015

42 . ज़िंदगी – एक नज़रिया


विकास या पतन हमेशा व्यक्तिगत होता है.
.इसके लिए किसी व्यक्ति,परिवार ,समाज,माहौल,संस्कार या परंपरा को दोष देना अपनी जिम्मेदारी से बचना भर है,जिम्मेदारी नकारना है.
एक शराबी बाप के दो बेटों में से एक शहर का गरीब मशहूर शराबी बनता है और दूसरा धनवान मशहूर उद्योगपति बनता है जबकि ज़िन्दगी की शुरुआत में दोनों के लिए ही एक समान सब कुछ था .
शराबी से पूछा गया तुम ऐसे क्यों हो ?
उसका जवाब था - मैंने अपने पिता को देखा कि वे शराब पीते है और किसी भी प्रकार के तनाव से मुक्त होकर मस्त हो जाते है .इसलिए मैं उनके जैसा बन गया.
दूसरे भाई से जब यही सवाल पूछा गया तो उसका जवाब था मैंने अपने शराबी पिता को देखा है कि किस तरह वे शराब पीकर अपनी जिम्मेदारी से मुँह चुराते थे, पलायन का रास्ता अपनाते थे और जिस दिन वे शराब पीकर आते थे उस दिन मेरी माँ को परेशान होते हुए और रोते हुए देखा है तभी मैंने सोच लिया था मुझे अपने पिता जैसा नहीं बनना है .
ये आप पर है कि आप किस घटना पर क्या सोचते है क्या रियेक्ट करते है इसके लिए किसी दुसरे को दोष देना गलत है .
अगर आप अच्छे है तो अपनी वजह से है,बुरे है तो अपनी वजह से है ,अमीर है तो अपनी वजह से है ,गरीब है तो अपनी वजह से है यानी जो कुछ भी जैसे भी आप है वो सिर्फ और सिर्फ अपनी वजह से है .
सुबोध-२८ अक्टूबर ,२०१५

1 comment:

Pallavi saxena said...

शायद इस लिए कबीर दास जी ने कहा है। सार्थक प्रस्तुति
"बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलया कौय
जो दिल खोजा आप ना मुझसे बुरा न कौय"।