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अगस्त, 2014 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

111 . सही या गलत -निर्णय आपका !

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मेरी पोस्ट  105 पर कुछ सवाल आये थे ,उसका जवाब-- मनीषजी , अंकुरजी  1) मेरी पोस्ट 86 , 88 और 105 देखें ,समझे . 2) कोई भी काम सोचने और शुरू करने से पहले अपनी टीम से राय करें ,उससे डिस्कस करें .   3) क्षेत्र के विशेषज्ञ से राय करें उसकी कंसल्टेंसी चार्ज उसे देवे , आपके पसंदीदा क्षेत्र पर वो एक विस्तृत सर्वे करकर आपको जो प्रोजेक्ट रिपोर्ट देगा आप उसे बराबर समझे उसके साथ एक प्रॉपर डिस्कस करें एक-एक पॉइंट पर स्पष्टीकरण  ले तभी काम शुरू करें , मैं इसे बेवकूफी के अलावा कुछ नहीं मानता कि आप कोई भी ऐसा फील्ड चुन  लेवे जिसमे आपका कोई दोस्त ,आपका कोई रिश्तेदार पैसा बनाने में सफल हो गया . ये ध्यान रखें हर व्यक्ति की अपनी-अपनी अलग विशेषता होती है ,हो सकता है उनमे जो क्वालिटी है वो आपमें नहीं हो.हर क्षेत्र में सफलता के लिए अलग-अलग क्वालिटी की ज़रुरत होती है . 4) विशेषज्ञ से रिपोर्ट आने के बाद और उससे डिस्कस  करने के बाद आप अपने लिए एक टू डू लिस्ट  बनाये ,जिसमे आप अपने जिम्मे क्या रखेंगे और अपनी टीम के जिम्मे क्या ,इसकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर...

ख्वाइशें

ख्वाइशें काफी दिनों से ठहरी है मेरे साथ मेरे घर में . एक पुराने बिछड़े दोस्त की तरह वक्त-बेवक्त जगाती है मुझे और पूछने लगती है वही जाने- पहचाने सवाल जो कभी चिढ़ाते है मुझे और कभी लगते है खुद का वजूद जब भी तन्हा होता हूँ मेरे पास आकर बैठ जाती है उसके आने से मन में उजाला हो जाता है तन्हाई उसकी बातों से खिलखिलाने लगती है एक नए सन्दर्भ के साथ मुझे अहसास है जब ये जुदा होगी मुझसे मैं बिखरूँगा और जब ये बन-संवरकर आ जाएगी मेरी ज़िन्दगी में मैं निखरूँगा. सुबोध- ३० अगस्त, २०१४

110 . सही या गलत -निर्णय आपका !

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       पैसा हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है , यह कड़ी मेहनत अमीर मानसिकता  के लिए अस्थायी होती है और गरीब मानसिकता  के लिए स्थायी . इसकी वजह ये है कि कड़ी मेहनत से कमाए हुए पैसे को लेकर दोनों के दृष्टिकोण अलग-अलग होते है - एक इसलिए कमाता है कि पैसे जमा कर सके और दूसरा इसलिए कि अच्छी ज़िन्दगी जी सके ,एक का दृष्टिकोण बड़ी खुशिया हासिल करने पर होता है और दूसरा बड़ी खुशियों के लिए छोटी-छोटी खुशिया नकार नहीं सकता ,एक आनेवाले कल को देखता है और दूसरा आज में जीता है . और अंततः होता ये है कि एक के पास कुछ पैसे जुड़ जाते है और दुसरे के पास नहीं जुड़ते .                     असली खेल यही से शुरू होता है -- पैसा ऊर्जा का एक रूप है ,जिस तरह काम ऊर्जा का एक रूप है . गरीब मानसिकता काम से ऊर्जा यानि पैसा पैदा करती है  जबकि अमीर मानसिकता पैसे से ऊर्जा यानि पैसा पैदा करती है ,सीधे शब्दों में कहुँ तो गरीब मानसिकता अब भी अपनी कड़ी मेहनत से पैसा पैदा करती है जबकि अमीर मानसिकता अपने इकट्ठे किये ह...

109 . सही या गलत -निर्णय आपका !

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              पैसे के प्रबंधन के बारे में जब गरीबों से बात की जाती है तो उनका जो जवाब होता है वो ये होता है कि " जब मेरे पास बहुत सारा पैसा होगा तब मैं पैसे का प्रबंध करना शुरू  करूँगा ."                          अगर आप गहराई में जाए तो आप समझ पाएंगे कि उनके लिए पैसे का प्रबंधन एक समस्या के अलावा कुछ भी नहीं है , अमूनन ये तत्काल संतुष्टि वाली श्रेणी के लोग है  ( पोस्ट ९७ देखें) और ये लोग पैसे का प्रबंध करने की बजाय   उसे खर्च करने वाले होते है , ये प्रबंध  नामक समस्या को  एक गलत नंबर के चश्मे से देखते है .                      पहली बात  आप के पास पैसा तब होगा जब आप उसका प्रबंध करना शुरू करोगे  ये तो कहना ही गलत है कि मेरे पास पैसा ज्यादा होगा तो मैं इसका प्रबध करूँगा , ये कहना तो बिलकुल ऐसा ही है कि  एक कमजोर आदमी  ये कहे   कि मेरे मस्सल्स ...

प्यार का किस्सा

तुमने जब थामा मेरा हाथ आंसुओं की हंसी फ़िज़ा में तैर गई मन के किनारों पर भावनाओं के हुजूम में एक-एक किस्सा एक-एक लम्हा सर पर हाथ रखने लगा आशीष की तरह डूबता सूरज नारंगी बिंदी बन चस्पा हो गया मेरे माथे पर मैं खिल गई महक गई पूनम की रात में रात रानी सी लिखने लगी जब प्यार का किस्सा मेरी कलम तुम्हारे नाम पे अटक गई !!! सुबोध - २७ अगस्त, २०१४

मेरा इश्क़ मेरा नसीब

इश्क़ का कुरता मैला हो गया और मेरी जीभ में जख्म इसकी पाकीज़गी बताते-बताते मगर निगोड़ा ज़माना मोहब्बत को ज़िन्दगी की अमावस समझता है रूह का नूर नहीं . शायद खुद गुजरे है उस नाकाम मोहब्बत के मकाम से आग के तूफ़ान से कि ज़माने को बचाने लगे है मोहब्बत के नाम से . ऐ ! मौला तेरी छत के नीचे वादों की छत बना रहा हूँ ठिठुरते इश्क़ को आगोश की गर्मी शायद कुछ सुकून दे और सूरज सा हौंसला मेरे ख्यालो को सच्चाई दे. मेरे मौला !! तू गवाह रहना जो हारे है उनका भी और मेरी जीत का भी उनकी नाकामी मेरा नसीब क्यों बने क्यों न मेरी जीत मेरी ज़िन्दगी बने ?   सुबोध - २६ अगस्त ,२०१४

108 . सही या गलत -निर्णय आपका !

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             जब गरीबों से पैसे के प्रबंधन की बात की जाती है तो आम तौर पर उनका जवाब होता है कि मेरे पास इतने पैसे है ही नहीं कि उनका प्रबंधन करूँ ,मुश्किल से दो वक्त की रोटी जुटा पाता हूँ .                    उनको जो  सलाह हो सकती  है वो ये है कि ऐसी हालत में भी उनको अपनी कमाई का 10 % हिस्सा  अपने भविष्य के लिए अलग से निकाल कर रख देना चाहिए .बाकी बचे  90 % में गुजारा करना चाहिए , एक महीने में  वे 90 % में गुजारा करना सीख जायेंगे और अगर उन्होंने अपनी इच्छाओं पर एक महीने तक  कंट्रोल कर लिया तो वे आगे भी कर सकते है . बात इच्छाओं को मारने की नहीं है बल्कि  बात पैसे के प्रबंधन की आदत की है, उस आदत की  जिस से अमीरी का दरवाज़ा खुलता है .                 कुछ गरीब कह सकते है कि 10 % निकालने के बाद हमें भूखा सोना पड़ेगा ,मेरा जवाब होगा- हाँ , आप भूखे सो जाइये और इस कहावत को याद कीजिये " भूखा पेट चिल्लाता है " और य...

107. सही या गलत -निर्णय आपका !

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                   मालिक वो होता है ,जो हासिल चीज़ों को सुव्यवस्थित तरीके से प्रबंधित करता है ,जो अपनी चीज़ों को बराबर प्रबंधित नहीं करते , वे जल्दी ही उन चीज़ों को या तो नष्ट हो जाने देते है या अपना मालिकाना हक़ खो देते है ,पैसा  इस साधारण से  सिद्धांत  का अपवाद नहीं है .                   वित्तीय सफलता ( अमीर ) और वित्तीय असफलता (गरीब ) के बीच का सबसे बड़ा फर्क पैसे के प्रबंधन का होता है .                  अमीर लोग पैसे का प्रबंधन करने में माहिर होते है और उसकी वजह मैंने अपनी पोस्ट 103  और  106  में बताई थी .                 गरीब लोगों द्वारा  पैसे का प्रबंधन न करना उनकी आधी-अधूरी सोच का नतीजा हो सकता  है या फिर उनकी गलत  कंडीशनिंग इसकी वजह...

क्या सही है , क्यों सही है ??? ( भाग-4 )

एक तूफ़ान जो गुजरा मेरे जिस्म पर से मेरी मासूमियत उड़ा ले गया मौत से भी खौफनाक ज़िन्दगी छोड़ गया जिनकी बाँहों में खेली-कूदी उनकी निगाहों में गलीज़ हो गई बाप के कंधे झुक गए माँ की आँखों में पानी भर गया भाई कहीं कमजोर हो गया सखी सहेलियाँ ,सारी गलबहियाँ अजनबी हो गई. फुसफुसाहट अपनी हो गई खिलखिलाहट  पराई हो गई खिड़की जो खोली थी सूरज ने रोशनी की अमावस की काली रात हो गई   उफ़ ! मैं औरत औरत  न रहकर   जिस्म हो गई बलात्कार झेला हुआ एक नाम हो गई बदन का पानी तेजाब बन जलाने लगा खुद को पड़ोसियों की कानाफूसी पीड़ा का पेड़ हो गई यारब ! ये क्या हो गया कल का फूल आज काँटा हो गया होठों  की हँसी आँखों की बरसात हो गई ज़माने में दिखाने को मेरा दर्द अपना हो गया और झेलने को पराया हो गया औरत होने की पीड़ा मेरा  नसीब हो गई माँ - बहन की कोख इज्जत हो गई और मेरी कोख गरम गोश्त हो गई रौंदी मैं गई और उफ़ ! उफ़!!  गुनाहगार भी मैं ही हो गई   !! सुबोध- २४ अगस्त,२०१४

106. सही या गलत -निर्णय आपका !

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हकीकत में अमीर गरीबों से ज्यादा स्मार्ट नहीं होते है. बस उनकी पैसे से सम्बंधित आदतें गरीबों से अलग और पैसे को बढ़ाने में मददगार होती है  जो मूल रूप से उनकी अतीत की कंडीशनिंग से जुडी होती है .                                        गरीबों के लिए बचत या निवेश उत्सव की तरह होते है जबकि अमीरों के लिए हर रोज़ किये जानेवाले  कामों की तरह एक आदत.और ये आदत होना ही उन्हें परफेक्शन देता है जो गरीबों के हिस्से में नहीं आती .                          अगर आप पैसे का उचित प्रबंधन नहीं करते है तो दो बातें हो सकती है ,पहली आपके दिमाग में इसकी प्रोग्रामिंग ही नहीं हुई है और दूसरी शायद आप ये जानते ही नहीं है कि पैसे का सही और उचित प्रबंधन कैसे किया जाता है .पहली बात आपकी कं...

105. सही या गलत -निर्णय आपका !

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एक सवाल Ratan Arjun Aug 9th, 2:07pm Dear sir, mane job chod kr do bar apna kam suru kiya lakin dono bar asaflta mili . m construction line m hu or m ab kuch nya krna chahta hu . pls mujhe koi rasta btao sir.. मेरा जवाब रतनजी, दो बार की असफलता के बाद भी आप तीसरी बार कोशिश करना चाहते है ,आपके जज्बे और सोच को सलाम ! कंस्ट्रक्सन लाइन में आप क्या करते है ,ये आपने स्पष्ट नहीं किया ,अगर आप स्पष्ट करते तो शायद में बेहतर तरीके से जवाब दे पाता. सर , आप मेरे पुराने पाठक है और मेँ ये मानकर चल रहा हूँ कि आपने मेरी सारी पोस्ट पढ़ी और समझी है ,अगर हो सके तो उन्हें दुबारा पढ़  लेवे, कुछ चीज़े जितनी ज्यादा बार रिपीट की जाती है उनके बारे मेँ आपका  दृष्टिकोण   उतना ही ज्यादा  साफ़-सुथरा होता जाता है . मैं ये मानकर चल रहा हूँ कि दो बार की असफलता ने आपको बहुत कुछ सिखाया होगा ,ध्यान रखियेगा वे असफलताएँ नहीं है वे आपकी आर्थिक आज़ादी की बैकबोन है और ताउम्र आपकी बेस्ट टीचर रहेगी . सर, कोई  नया व्यवसाय शुरू करने से पहले इन बातों का  ध्यान रखे -  ...

104. सही या गलत -निर्णय आपका !

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अमीर यु हीं अमीर नहीं होता ( २) दायरा जो बनाते है आप निर्भर है उसकी उपलब्धि आपके समर्पण पर ... - दायरा मेंढक का होता है तालाब, और बाज़ का आकाश, सरहदों से आज़ाद आकाश . - मेंढक जब सोचता है बाज़ बनने की, रोकती है उसे उसकी मानसिकता, जहाँ मौजूद है फ़ेहरिश्त खतरों की . - त्याग है आरामदेह दायरे का, ख़ौफ है अपनी वास्तविकता बदलने का , मेहनत है अपनी काबिलियत के विस्तार की, और जहाँ ज़रूरत है एकाग्रता की , साहस की, विशेषज्ञता की , शत प्रतिशत प्रयास की , और सबसे बड़ी बाज़ की मानसिकता की. .- और देखकर इस फ़ेहरिश्त को कुछ मेंढक मेंढक रह जाते है और कुछ मेंढक बाज़ बन जाते है . - अपना-अपना दायरा है चाहत का, चुनाव का, समर्पण का. क्योंकि दायरा जो बनाते है आप निर्भर है उसकी उपलब्धि आपके समर्पण पर .. सुबोध- २२ मई , २०१४  www.saralservices.com ( one sim all recharge , MLM )

103 . सही या गलत -निर्णय आपका !

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103 . सही या गलत -निर्णय आपका !                    गरीब मानसिकता के लोग एक रुपये को सिर्फ एक रूपया मानते है जिसके बदले में वे लोग कोई चीज़ खरीदकर तत्काल संतुष्टि चाहते है उनकी निगाह में ये ऐसा गेहूँ है जिसकी  रोटी बननी है और उसे खाना है   जबकि अमीर मानसिकता के लोग इसे एक रूपया नहीं मानते , वे इसे ऐसा योद्धा मानते है जिसके दम पर उन्हें वित्तीय स्वतंत्रता हासिल होगी .उनके लिए ये गेहूँ एक बीज है जिसे बोकर वे ढेरों गेहूँ  पाएंगे -और उन ढेरों गेहुंओं  को बोकर और ढेरों गेहूँ पाएंगे- चक्रवृद्धि व्याज की तरह.                                          गरीब मानसिकता  एक रुपये की कीमत आज में देखती  है जबकि अमीर मानसिकता उस एक रुपये की कीमत आज में नहीं कल में देखती  है - और ये कल में देखना ही उसे निवेश करने को उत्साहित करता है .    ...

102 . सही या गलत -निर्णय आपका !

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हम सभी में दो भावनाएँ होती हैं डर और लालच . पैसा न होने के डर से हमे कार्य करने की प्रेरणा मिलती है और पैसा हाथ में आने के बाद लालच की भावना जाग जाती है ,ये भी हमारे पास होना चाहिए और वो भी . लालच -इसे इच्छा भी कह सकते है, का कहीं कोई अंत नहीं होता , सो आदमी एक चक्र में फंस जाता है पैसा कमाओ इच्छाएं पूरी करो और कमाओ और इच्छाएं पूरी करो और कमाओ --- ये चक्र कहीं रुकता नहीं है .इसे पढ़े-लिखे लोग कोल्हू का बैल, रेट रेस  कहते है कि सब कुछ किया लेकिन अंततः वही के वही रह गए - कमाने से बिल चुकाने तक .   वित्तीय स्वतंत्रता आपको इस रेट रेस से आज़ादी दिलाती है . - सुबोध www.saralservices.com ( one sim all recharge , MLM )

आओ कान्हा ,आओ !!

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तंग न करो कान्हा न बजाओ बांसुरी मैं बहुत दुखी हूँ अभी हरे है कई घाव दर्द से कराहती आत्मा के साथ कैसे नाचूँ कैसे झूमूँ तुम्हारी बांसुरी की तान पर ... कुछ करो कान्हा अब झूट-मूट का तुम्हारा जन्मदिन मनाने का नहीं सच में तुम्हारा अवतार का वक्त आ गया है . आओ कान्हा , आओ !! जन्मों नहीं अवतार लो !!! अब तो पीड़ित मानवता के दर्द हरो !!! सुबोध- अगस्त १७, २०१४ जन्माष्टमी पर

101. सही या गलत -निर्णय आपका !

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ताकि कल जीत सकूँ .... हाँ, मैं स्वीकार करता हूँ अपनी हार ... लेता हूँ पूरी जिम्मेदारी ... नहीं देता किसी को भी दोष तरफदारी नहीं करूँगा खुद की कि मैं सही था वक़्त गलत हो गया नहीं करूँगा बेवजह की शिकायत और ये सब कर रहा हूँ सिर्फ इसलिए कि कल मेरी कोई हार न हो ... ... मैं करता हूँ स्वीकार मुझमे नहीं था वो जज़्बा कि जीत होती मेरी संपूर्ण समर्पण से ही हासिल होता है लक्ष्य ...... -- मैं करता रहा शिकायत कमियों की, खामियों की भूल गया हासिल को और सारा ध्यान रहा कमियों,खामियों पर कहते है जिसके बारे में शिद्दत से सोचते हो वही मिलता है सो मुझे  कमियाँ और  खामियाँ  मिल गयी करता अगर प्रयास लगा कर जान की बाज़ी इन्हे दूर करने का तो निश्चित ही अलग होता परिणाम - मेरा पूरा प्रयास था बचूं हार से शायद इसी लिए हार गया क्योंकि मेरे अवचेतन में लक्ष्य हार से बचना भर था जीत का तो कहीं ज़िक्र भी न था . हाँ, में स्वीकार करता हूँ अपनी हार लेता हूँ पूरी जिम्मेदारी ताकि कल जीत सकूँ .... सुबोध- २१, मई २०१४ www.saralservices.com ( one ...

100. सही या गलत -निर्णय आपका !

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मेरे एक पाठक का सवाल था sar ji mene aap ke sabhi artical pare.meri yek samsya ko door kijiye mera medical ka thok ka weyapar he acha chal raha he par mene apne jiwan istar ko warane ke liye karj le liya ab use chukane ka rasta nahi mil raha he agar me apne weyapar se jeyada rupye nahi nikal sakta keya karna chahiye. मेरा जवाब--- जो क़र्ज़ आपको दिए गए ब्याज से ज्यादा रिटर्न दिलाता है वो क़र्ज़ अच्छा क़र्ज़ होता है और जो क़र्ज़ आपको दिए जानेवाले ब्याज  से कम रिटर्न दिलाता है वो क़र्ज़ बुरा क़र्ज़ होता है . क़र्ज़ के दम  पर अगर आपने अपने जीवनस्तर को सुधारने का प्रयास किया है तो ये एक अव्यवहारिक कदम है - यह एक बुरा क़र्ज़ है कभी भी कोई अतिरिक्त खरीददारी या खर्च  करें  उसे अपनी अतिरिक्त कमाई में से करें ,अमीर लोग यही करते है .  अगर आप बुरे कर्ज के जाल में फंस चुके है तो उसे चुकाने के कुछ तरीके नीचे लिख रहा हूँ 1- पैसे को सही तरीके से मैनेज करें -- उम्मीद है मेरी पुरानी पोस्ट्स को देखते हुए आपने कमाई में से 10% अलग रखना शुरू कर दिया होगा - उसके बाद ही आप अपने ...

99. सही या गलत -निर्णय आपका !

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कम प्रयासों से ज्यादा उपलब्धि कर पाना लीवरेज कहलाता है .  पोस्ट 75 देखे, यहाँ पर अमीर समय का लीवरेज कैसे पैदा करते है इस बारे में बताया गया है . पोस्ट 82  , 86  में हल्का सा इशारा है कि पैसे का लीवरेज कैसे पैदा किया जाता है ,. बहरहाल आपको अमीर बनने के लिए महत्वपूर्ण  चीज़ जो समझनी है वो लीवरेज की ताकत समझनी चाहिए,जब तक आप ये नहीं समझते और इसका उपयोग नहीं करते आप उस व्यक्ति के लिए चारा है जो  लीवरेज को समझता है तथा  उपयोग करता है.  अमीर लोग लिवरेज के सिद्धांत को समझते है और उसका इस्तेमाल करते है . वे दुसरे लोगों को काम पर रखते है जो उनके लिए समय का लिवरेज पैदा करते है और वे लोग लोन लेकर  या अपने वेंचर में शेयर देकर दुसरे से  पैसा लेकर  पैसे का लिवरेज पैदा करते है . ये समय एवं पैसे का लीवरेज आम आदमी से कई गुणा ज्यादा  पैसा उनके लिए पैदा करता है. यही उनकी अमीरी का राज है और  अमीर एवं  गरीब में यही सबसे बड़ा फर्क है कि एक खुद मेहनत करता है जबकि दूसरा लीवरेज का उपयोग करता है . - सुबोध www.saralservices....

98. सही या गलत -निर्णय आपका !

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अमीरी या गरीबी का निर्णय  ऊँची सैलरी या ऊँची कमाई नहीं होता है बल्कि कमाए गए पैसे में से आपने बचाया क्या है , इस से होता है . " अ " लाख रूपये महीने कमाने वाला बंदा जिसका खर्च 98  हज़ार रूपया महीना है ,और" ब "  जो 30  हज़ार रूपया महीने का कमाता है उसका खर्च 27 हज़ार है तो अमीर "अ" नहीं" ब" होता है अगर 5  साल यानि 60 महीने बाद की इनकी स्थिति समझी जाए तो "अ" 1  लाख  20  हज़ार का और "ब" 1लाख 80 हज़ार का मालिक होता है और ये तो सीधी सी गणित है . "अ" खर्चे में, लिविंग स्टैण्डर्ड में  आपको अमीर लग सकता है और "ब" गरीब  लेकिन" अ"  और" ब" की 5  साल बाद की बैलेंस शीट जो कहती है वो कुछ अलग ही कहानी है .छोटी सी लगनेवाली 1 हज़ार की एक्स्ट्रा बचत लम्बे समय में कितना बड़ा फर्क  बनती है ये इस उदाहरण  से स्पष्ट है .                         ये बात अच्छे से समझ लेवें कौन कितना कमाता है, उसका लिविंग स्टैंडर्ट कै...

97. सही या गलत -निर्णय आपका !

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अगर आपने पैसा  बनाने में बहुत ज्यादा मेहनत की है तो आप पैसे  की कदर भी बहुत ज्यादा करेंगे और अगर आपको पैसे  आसानी से मिले  है तो आप उसकी कदर नहीं करेंगे ."  मेरा मानना है कि ये कहावत सही नहीं है और इसके लिए मेरा तर्क ये है कि पैसा कमाने के लिए जो काबिलियत इस्तेमाल होती है वो उस काबिलियत से बिलकुल अलग है जो पैसा खर्च करने या रोककर रखने के लिए चाहिए . इसे थोड़ा गहराई में जाकर समझते है -  पैसे के मामले में तीन  तरह की मानसिकता होती है पहली - जिन्हे तत्काल संतुष्टि चाहिए होती है - ऐसी मानसिकता के लोग किसी चीज़ की इच्छा होने पर खुद को कंट्रोल नहीं कर पाते उन्हें ये इच्छा तुरंत पूरी करनी होती है चाहे इसके लिए किसी से इन्हे उधार भी लेना पड़े तो ये ले लेते है - ये कमज़ोर व्यक्तित्व के लोग होते है ऐसी मानसिकता के लोगों की कमाई चाहे जितनी हो ये हमेशा कर्ज़े में ही डूबे रहते है क्योंकि इनका अपनी इच्छाओं पर वश नहीं होता . दूसरी - इस मानसिकता के लोग सिर्फ जरूरत भर ही खर्च करते है बाकि पैसे इकट्ठे करकर कुछ बड़ा पाना चाहते है उन्हें विलम्ब से संतु...

96. सही या गलत -निर्णय आपका !

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हम कारण और  परिणाम की दुनिया में रहते है जो कुछ करते है उसके पीछे कोई न कोई  कारण होता है और उस  कारण की वजह से हम कार्य करते है .ज़ाहिर सी बात है किये हुए कार्य का परिणाम भी मिलेगा . आपकी कंडीशनिंग आपके विचारों को पैदा करती है ,आपके विचार आपकी भावनाओं को , भावनाएं कार्य और कार्य परिणामों को . अगर आपको अपनी कंडीशनिंग बदलनी है तो पहले स्वयं में स्वीकृति  पैदा करें कि " हाँ ,मुझमें  ये गलत कंडीशनिंग हुई है"  कब हुई , कहाँ से हुई ,कैसे हुई ,क्यों हुई इन सब की विस्तृत डिटेल तैयार करें जब आपको ये पता चल जाता है कि  सोचने का वर्तमान तरीका आपका स्वयं का नहीं है बल्कि किसी और का है तो अब आप चुनाव कर सकते है कि  आगे इसी तरीके से सोचना जारी रखा जाए या और कोई नया तरीका अपनाया जाए . जब आप ये सब स्थिति समझ लेवे तब आप स्वयं को नए सिरे से रि -कंडिशन कर सकते है -- जो आपका खुद का सोचने का तरीका होगा ,अपने भविष्य को ध्यान में रखते हुए अपनी जरूरत के अनुसार आप अब खुद के नियम बना सकते है . - सुबोध पुनश्च - इस बारे में पोस्ट 91 और 92  भी दे...

कुछ टुकड़ों में

वो मासूम बच्चा पाँच साला जानता है अहमियत पैसे की कि सिक्कों में कुछ नहीं मिलता नोट मांगता है भीख में. - सुबोध १९ जुलाई,२०१४

कुछ टुकड़ों में

ज़िन्दगी में जब तुमको कोई रास्ता दिखाई न दे , कोई मंज़िल दिखाई न दे , कोई अपना दिखाई न दे , तब मेरे पास आना . - - - - - - और मेरी गोद में लेटना तुम्हारा मन बिलकुल शांत हो जायेगा माँ की गोद ऐसी ही होती है. -सुबोध - २३ जुलाई , २०१४

क्या सही है , क्यों सही है ??? ( भाग-3 )

बूढ़े बरगद के नीचे दो जिस्म कटे पड़े है दोनों पर मक्खियाँ भिनभिना रही है खून जो दोनों का बहा है रंग उसका लाल है हवा दोनों के ही बदन को छूकर गुजर रही है बिना किसी भेद-भाव के दोनों के चेहरे पर ठहरी है हिंसा यकसां बरगद की टूटी शाखों के बीच से छनकर आते धुप के टुकड़े झिलमिला रहे है दोनों के ही जिस्म पे एक के जिस्म पे लिपटी है रामनामी और दुसरे के सर पे गोल टोपी ज़िंदा होते एक हिन्दू था दूसरा मुसलमान एक हर-हर महादेव था दूसरा अल्ला-हो अकबर था एक मंदिर था एक मस्जिद था और मरने के बाद दोनों इंसान हो गए हाँ, दोनों इंसान हो गए !!! नहीं , ये ज़िंदा रहते भी एक हिन्दू था और दूसरा मुसलमान और मरने के बाद भी . हम धर्म नहीं है हम मजहब नहीं है बल्कि हम धरम के नाम पर मजहब के नाम पर तुम्हारे जिस्म का खून है तुम्हारी रूह का सुकून है वो इंसानी जज्बात है जिसके बिना इंसान हैवान है ज़िंदा तो क्या हम तो मुर्दों का भी रखते ख्याल है अब देखना हिन्दू जलाया जायेगा मुसलमान दफनाया जायेगा एक में पंडित और दुसरे में मौलवी काम आएगा एक का बारहवाँ होगा दुसरे का चालीसा हम तुम्...

कुछ टुकड़ों में

बारिश में बहाते थे जब कागज की कश्ती और खिलखिलाते थे उसका बहना देखकर उस खिलखिलाहट में ग़ुम हो जाती थी पहचान कि ये कौन हंस रहा है हिन्दू या मुसलमान सुबोध - ८ अगस्त ,२०१४

95. सही या गलत -निर्णय आपका !

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अपने टीम मेंबर्स  को सिखाइये ,उन्हें प्रोत्साहित कीजिये और उन पर विश्वास कीजिये .अगर आपको व्यवसाय बड़ा करना है तो एक अच्छी और बड़ी टीम आपके पास होनी चाहिए . अगर आप ऐसा नहीं करते है  तो अपने बिज़नेस की ग्रोथ आप ख़त्म कर रहे है .               अगर आपको ये  डर है कि जिस दिन ये काम सीख लेगा उस दिन  मुझे छोड़कर खुद का काम शुरू कर लेगा तो ये डर फ़िज़ूल है . व्यापारी बनने के लिए जिन चीज़ों की ज़रुरत है उनमे सबसे अहम है हिम्मत - जोखिम लेने की हिम्मत . खुद की पूँजी, खुद की शौहरत ,खुद का वक्त दांव पर लगाने की हिम्मत हर एक में नहीं होती और जिस व्यक्ति में यह साहस है वो व्यक्ति आप कुछ नहीं सिखाएंगे तो कहीं और से सीख लेगा उस स्थिति में आपसे कम्पीटीशन  भी करेगा और आप उसे कुछ कह भी नहीं पाएंगे ,अगर आपने उसे सिखाया है तो कम से कम आपसे कम्पीटीशन  करने में हिचक तो उसे महसूस होगी ही और अगर पीठ पीछे आपसे कम्पीटीशन करता भी है तो आप उसे समझा सकते है कि व्यवसाय तो समुन्दर की तरह है जहाँ मैं  खड़ा हूँ वही से पानी निकालना  क्य...

94. सही या गलत -निर्णय आपका !

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अपनी सैलरी बढ़वाने   के लिए   आम तौर पर सीनियरिटी या महंगाई बढ़ने की बात की जाती है कृपया इन दोनों ही बातों को एक छोटे व्यापारिक प्रतिष्ठान के मालिक की नज़र से समझे , उसका जो जवाब हो सकता है उसे भी समझे. क्या सीनियरिटी की वजह से आप कोई अतिरिक्त उत्पादकता बना पा रहे है - निश्चित ही नहीं . आप अब भी पहले जितना ही काम कर रहे है तो बढ़ोत्तरी किस बात की ? महंगाई बढ़ने से क्या कंपनी को कोई अतिरिक्त आमदनी हुई है ? यदि नहीं तो महंगाई बढ़ना आपकी समस्या है इसमें कंपनी आपकी क्या मदद कर सकती है ? ऐसे में आपको चाहिए कि अपनी सैलरी बढ़वाने के लिए आप अपना मूल्य बढ़ाये - अपने में कोई ऐसी अतिरिक्त क्वालिटी पैदा करे जिसकी ज़रुरत आपकी कंपनी को हो .तत्पश्चात मालिक के सामने सैलरी बढ़ाने   की बात करे और उन्हें ये बताये कि मैं कंपनी के लिए ये अतिरिक्त कार्य करूँगा . ध्यान रखे अपना मूल्य आप खुद बढ़ाते है और अपना मूल्य बढ़ाने   के लिए आपको अपने में कुछ अतिरिक्त योग्यता बढ़ानी पड़ती है . मोरल- अमीर मानसिकता के लोग मालिक की मानसिकता को समझते है और बढ़ाये गए वेतन के   बदले में उ...

सकारात्मकता

मेरे दोस्त !! मेरे शुभचिंतक !! मैं शुक्रगुजार हूँ तुम्हारा तुम्हारी मेहरबानियों का . मुझे इस्तेमाल करके ये बताने का कि “मुझ से बेहतर और कोई दोस्त नहीं मिल सकता तुम्हे !!” और जब मेरा बुरा वक्त आया मैं अकेला था . कहते है अँधेरे में तो साया भी साथ छोड़ देता है तुम मेरे बेहतरीन दोस्त तुम्हे शायद भरोसा था मेरी काबिलियत पर कि हर मुसीबत से निकल सकता हूँ मैं और मैं निकल आया ... आ गया पहलेवाली शानो-शौकत में . शुक्रगुजार हूँ मैं तुम्हारा कि तुमने मुझे नए सिरे से परखने दी अपनी काबिलियत .... आओ दोस्त !! आओ, पास बैठो पहले की तरह ठहाके लगाएं पुराने किस्से सुनाये और वक्त जरूरत एक -दूसरे के काम आएं !!! सुबोध - २ अगस्त, २०१४

93. सही या गलत -निर्णय आपका !

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दोस्त हरेक के होते है , आपने अपने दोस्तों से क्या सीखा ? मान लीजिये आपका एक दोस्त अमीर है और दूसरा गरीब .आप गौर   करें अमीर दोस्त का उठना बैठना , बात का अंदाज़ , उसकी बातों का कॉन्फिडेंस , किन सब्जेक्ट पर उसे बातें करना पसंद है उसके सपने , उसकी हताशा , उसका उत्साह -यानी उसकी हर बात का , हर एक्शन का ढंग से मुआयना करें . यही मुआयना अपने गरीब दोस्त का करें . दोनों का फर्क देखे , दोनों की मानसिकता में से आपको अपने मतलब का   क्या लगता है , आप ज्यादा किसे पसंद करते है और क्यों ? कहते है खून के रिश्तों को आप नहीं चुन सकते ये उपरवाले की देन है   . लेकिन दोस्ती का रिश्ता - संसार का सबसे खूबसूरत रिश्ता आप चुन सकते है - लिहाज़ा ये रिश्ता बहुत सोच -समझ कर चुने .ध्यान रखें आपकी   आजकी स्थिति का निर्माण आपके गुजरे हुए कल ने किया है और आने वाले कल (भविष्य) का निर्माण आपका आज करता है   तो अपने भविष्य की खूबसूरती का निर्माण करने के लिए आज आप जो भी काम करे , बहुत सोच-समझ कर करें , जो भी दोस्त चुने सोच समझ कर चुने. मैं सही   दोस्त   चुनने की बात इसलिए कह रहा हू...

92. सही या गलत -निर्णय आपका !

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कंडीशनिंग को समझने के लिए अमूनन जो उदाहरण लिया जाता है उसे ही ले रहा हूँ . जब हाथी का बच्चा छोटा होता है तो उसे मजबूत रस्सी से बांध दिया जाता है वो मासूम बच्चा खुद को रस्सी से   छुटाने की बड़ी कोशिश करता है लेकिन रस्सी मजबूत होती है और वो छूट नहीं पाता , लगातार कोशिश करने और लगातार हारने के बाद धीरे-धीरे ये बात उसके दिमाग में घर कर जाती है कि रस्सी बहुत मजबूत है और मैं आज़ाद नहीं हो पाउँगा . एक दिन वो हाथी वयस्क हो जाता है अब रस्सी उसकी ताकत से कमजोर है लेकिन चूँकि ये उसके दिमाग में बैठा हुआ है कि रस्सी मजबूत है सो वो प्रयत्न ही नहीं करता - हाथी के दिमाग में जो बैठाया गया है कि तुम रस्सी के मुकाबले कमजोर हो इसे ही कंडीशनिंग कहते है कुछ लोग इसे ब्रेन वाश करना भी कहते है .. बचपन में बहुत से लोगों के साथ पैसे को लेकर इसी तरह की कंडीशनिंग की जाती है . जैसे अपनी गरीबी की मजबूरी की वजह से या खुद की नाक़ाबिलियत को जायज़ ठहराने के लिए या अपनी विपरीत परिस्थितियों की वजह से - कारण जो भी हो माँ-बाप जब बच्चे से   ये कहते है "पैसा बुराई की जड़ है " और समर्थन में कुछ उदहारण देते हो ...